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आयुर्वेदोक्त 41 गुणों के वर्गीकरण- Padarth vigyan notes- BAMS notes

प्रिय शिक्षार्थी, संस्कृत गुरुकुल में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में हम आयुर्वेदोक्त 41 गुणों के वर्गीकरण का अध्ययन करेंगे। यह विषय पदार्थ विज्ञान के नोट्स, बीएएमएस प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। इसके पिछले अध्याय, द्रव्य निरुपन में, हम पहले ही निम्नलिखित विषयों को शामिल कर चुके हैं:

आयुर्वेदिक मतानुसार गुणों की संख्या 41 है, तथा इन्हे निम्न चार समूहों मे वर्गीकृत किया गया है।

सार्थ गुण या विशेष गुण - 5 (इंद्रियर्थ गुण )

"अर्थाः शब्दादयो ज्ञेया गोचरा विषया गुणाः' ।

(च.शा. 1.31)
शब्दआवाज़
स्पर्शछूना
रूप रंग
रस स्वाद
गंध खुशबू 

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आध्यात्मिक गुण - 6

'इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं प्रयत्नश्चेतना धृतिः ।
बुद्धिः स्मृतिरहङ्कारो लिंगानि परमात्मनः' ।।

(च.शा. 1.72)
इच्छाअभिलाषा
द्वेषघृणा
सुखआनंद 
दुःख कष्ट
प्रयत्न प्रयास 
बुद्धिज्ञान 


(चेतना, स्मृति, धृति, अहंकार अरे बुद्ध- विशेष)। 

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गुरुवादी गुण - 20

'गुरु मन्द - हिम - स्निग्ध - श्लक्ष्ण - सान्द्र- मृदु - स्थिराः । 
गुणाः ससूक्ष्मविशदा विंशतिः सविपर्ययाः' ||

(अ.हृ.सू. 1.18)
गुरु (भारीपन)लघु  (हल्कापन)
मंद (कम)तीक्ष्ण  (शोधन)
शीत  (ठंडा)उष्ण (गरम)
स्निग्धा (वसा)रुक्ष (सूखापन)
श्लक्षण (चिकनाई)खर (खुरदरापन)
सान्द्र (ठोसता)द्रव (तरलता)
मृदु (कोमलता)कठिन (कठोरता)
स्थिर (स्थिरता)सर (गतिशीलता)
सूक्षम (जटिल)स्थुल (स्थूलता)
विशाद (स्पष्टता)पिच्छिल (चिकनापन)

परादि गुण - 10

'परापरत्वे युक्तिश्च संख्या संयोग एव च ।विभागश्च पृथक्त्वं च परिमाणमथापि च ।।
संस्कारोऽभ्यास इत्यते गुणा ज्ञेयाः परादयः' ।

(च.सू. 26.29-30)
परत्व प्रधान या बेहतर 
अपरत्व अप्रधान या निचला 
युक्ति योजना 
संख्या गणित या संख्यात्मक 
संयोगमेल या युति या जोड़ 
विभागवियोजन 
पृथक्तवविभेदक कारक
परिमाण आकार
संस्कार गुणान्तरधान या प्रर्वत्ति
अभ्यास सतत क्रिया

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गुरुवादी गुण के विशेष लक्षण

क्र. स. गुण कर्मक्र. स. गुणकर्म
1गुरुबृंहण कर्म 2लघु लंघन कर्म 
3मंदशमन कर्म4तीक्ष्ण शोधन कर्म
5शीतस्तम्भन कर्म6उष्ण स्वेदन कर्म
7स्निग्धाक्लेदान कर्म8रूक्षशोषण कर्म
9श्लक्षणरोपण कर्म10खरलेखन कर्म
11सान्द्रप्रसादान कर्म12द्रवविलयन कर्म
13मृदुश्लथने कर्म14कठिनदृढ़ीकरण कर्म
15स्थिरधारण कर्म16सरप्रेरणा-गति कर्म
17विशदक्षालन कर्म18पिच्छिललेपन कर्म
19सूक्षमविवरणे कर्म20स्थुलसवरण कर्म

अन्य गुणों  का विवरण

  • पृथ्वी गुण - 14 - (द्रवत्व, नैमित्तिक)
    गन्ध, रस, रूप, स्पर्श, सांख्य, परिमाण, पृथक्त्वा, संयोग, विभाग, परत्वा, अपरात्व, द्रवत्व, गुरुत्व, संस्कार।
  • जल गुण - 14 (द्रव्यत्व, समसिद्धिका)
    रस, रूप, स्पर्श, सांख्य, परिमण, पृथक्त्वा, संयोग, विभाग, परत्वा, अपरात्व, द्रवत्व, गुरुत्व, स्नेहा, वेगा।
  • तेजो गुण 11 (द्रवत्वा, नैमित्तिक)
    रूप, स्पर्श, सांख्य, परिमाण, पृथक्त्वा, संयोग, विभाग,
  • वायु गुण - 9
    सांख्य, स्पर्श, परिमाण,  पृथाक्त्वा, संयोग, विभाग, परत्व, अपरत्व, वेग। 
  • आकाश गुण - 6
    सांख्य, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, शब्द।
  • काल गुण- 5
    सांख्य, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग।
  • दिक गुण - 5
    सांख्य, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग।
  • महेश्वर या परमात्मा गुण  - 8
    सांख्य, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, बुद्धि, इच्छा, प्रयास।
  • मानस गुण - 8
    सांख्य, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विभाग, परत्वा, अपरत्व, वेग। 
  • विशेष लक्षण या गुण :
    • गंध गुण केवल पृथ्वी में मौजूद है।
    • रस गुण केवल पृथ्वी और जल में मौजूद है।
    • रूप गुण केवल पृथ्वी, जल, तेजस में मौजूद है।
    • स्पर्श गुण केवल पृथ्वी, जल, तेजस और वायु में मौजूद है।
    • शब्द गुण केवल आकाश में मौजूद है।
  • सांख्य, परिमन, पृथक्त्वा, संयोग, विभाग- 5 गुण सभी द्रव्य में मौजूद है।
  • परत्वा, उपकरण विभु द्रव्य में अनुपस्थित है। .
  • गुरुत्व - पृथ्वी और जल में उपस्थित।
  • स्नेहा - केवल जल में।
  • स्थितस्थपाटक केवल पृथ्वी में है

इस पोस्ट मे हमने आचार्य चरक तथा आयुर्वेद मे वर्णित 41 गुणों का अध्ययन किया। अगली पोस्ट मे हम इन सभी का विस्तार पूर्वक अध्ययन करेंगे। गुण निरूपण हम पिछले पोस्ट मे अध्ययन कर चुके है।

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