अपराधी कौन? आज की विक्रम बेताल की कहानी का शिर्षक है "अपराधी कौन?" राजा विक्रमादित्य ने वृक्ष से पहले की ही भांति बेताल को नीचे उतारा और उसे कंधे पर डालकर अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। जाते हुए राजा से बेताल बोला, ‘राजन, इस बार तुम्हें एक छोटी सी कथा सुनाता हूं, सुनो।’ बनारस में देवस्वामी नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसके हरिदास नाम का पुत्र था। हरिदास की सुन्दर पत्नी थी। नाम था लावण्यवती। लावण्यवती अपूर्व सुंदरी थी। ऐसा लगता था जैसे तिलोत्तमा आदि स्वर्ग की अप्सराओं का निर्माण करके विधाता को जो कुशलता प्राप्त हुई थी, उसी के द्वारा उसने उस बहुमूल्य रूप-लावण्य वाली स्त्री को बनाया था। एक दिन वे दोनों जब महल के ऊपर छत पर सो रहे थे कि आधी रात के समय मदनवेग नामक गंधर्व-कुमार आकाश में घूमता हुआ उधर से निकला। उसने पति के पास सोई हुई लावण्यवती को देखा, जिसके वस्त्र थोड़े खिसक गए थे और उसके अंगों से सुंदरता झलक रही थी। वह लावण्यवती के रूप पर मुग्ध होकर उसे उड़ाकर ले गया। जागने पर हरिदास ने देखा कि उसकी स्त्री नहीं है तो उसे बड़ा दुख हुआ और वह मरने के लिए तैयार हो गया। लोगों क...