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गुर्वादि गुण (भाग - 2)

प्रिय शिक्षार्थी, संस्कृत गुरुकुल में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में हम गुर्वादि गुणों का अध्ययन करेंगे। यह विषय पदार्थ विज्ञान के नोट्स, बीएएमएस प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। 10 गुर्वादि गुण हम पिछले पोस्ट मे अध्ययन कर चुके है। इसके पिछले अध्याय, द्रव्य निरुपन में, हम पहले ही निम्नलिखित विषयों को शामिल कर चुके हैं: Related topics from the Dravya Nirupana Chapter Dravya (द्रव्य) Panchamahabhuta- पंचमहाभूत Akasha Mahabhuta (आकाश महाभूत) Vayu MahaBhuta (वायु महाभूत) मृदु गुर्वादि गुण (जो कोमलता के लिए जिम्मेदार है) व्याख्या 'यस्य द्रव्याणि श्लथने कर्माणि शक्तिः स मृदुः' । (अ.हृ.सू. 1.18; हेमाद्रि) जिस गुण के कारण शिथिलता (कोमलता) आती है, उस गुण को मृदु गुण कहते हैं। महाभूत प्राधान्य मृदु गुणयुक्त द्रव्यों में जल और आकाश महाभूत की प्रधानता होती है। गुणकर्म दाहेत्यादि (दाहपाककरस्तीक्ष्णः स्रावणो, मृदुरन्यथा ) अन्यथेति अदाहपाककरोऽस्त्रावण इत्यर्थ । सु.सू.46/518 पर डल्हण टीका। अदाहकर - मृदु गुण दाह का नाश करता है। (जलन कम करता है) अपा...

गुर्वादि गुण (भाग -1)

प्रिय शिक्षार्थी, संस्कृत गुरुकुल में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में हम आयुर्वेदोक्त गुर्वादि गुणों का अध्ययन करेंगे। यह हम प्रत्येक गुण की व्याख्या, प्रधान महाभूत, गुणकर्म, चिकित्सीय महत्त्व , कहाँ वर्जित है, तथा उदाहरण की सहायता से जानने का प्रयास करेंगे। यह विषय पदार्थ विज्ञान के नोट्स , बीएएमएस प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। इसके पिछले अध्याय, द्रव्य निरुपन में, हम पहले ही निम्नलिखित विषयों को शामिल कर चुके हैं: Related topics from the Dravya Nirupana Chapter Dravya (द्रव्य) Panchamahabhuta- पंचमहाभूत Akasha Mahabhuta (आकाश महाभूत) Vayu MahaBhuta (वायु महाभूत) गुर्वादि गुण को शारीरिक या शारीर गुण भी कहते है। इन्हे सामान्य गुण भी कहा जाता है और इन्हे ही द्रव्य गुण भी कहा जाता है। यह संख्या मे 20 है । आचार्य वागभट ने गुर्वादि गुणों को  द्वंद्वगुण के रूप मे प्रस्तुत किया है। इसका अर्थ है दो का जोड़ा जो एक दूसरे के विपरीत धर्म वाले होते है। विभिन्न गुर्वादि गुण को  नीचे वर्णित हैं: गुर्वादि गुणों के नाम विंशतिगुणः, गुरूलघुशीतोष्ण...