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अनुमान प्रमाण- पदार्थ विज्ञान- Anuman praman- Padarth vigyan

ज्ञान की अनुभूति 2 प्रकार की होती है 1) प्रत्यक्ष 2) अप्रत्यक्ष। प्रत्यक्ष ज्ञान का बोध इंद्रियार्थसन्नि-कर्ष से होता है और अप्रत्यक्ष ज्ञान का बोध अनुमान, उपमान, युक्ति, शब्द प्रमाण आदि से होता है। 'प्रत्यक्षं हि अल्पं अनलपम अनलपम अंबृद्धम्'। (चरक) प्रत्यक्ष का दायरा और सीमा बहुत कम है और प्रत्यक्ष का अधिक, इसलिए दर्शन और आयुर्वेद में अनुमान आदि प्रमाणों को सर्वाधिक प्राथमिकता दी जाती है। अनुमान प्रमाण को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और इसे एक स्वतंत्र प्रमाण के रूप में माना जाता है, लेकिन सच्चे ज्ञान को प्राप्त करने के लिए इसमें प्रत्यक्ष ज्ञान या आप्टोपदेश का पूर्व अनुभव होना चाहिए। अनुमान (निरुक्ति) की व्युत्पत्ति अनुमान शब्द "अणु" उपसर्ग, "म" धातु और "ल्युट" प्रत्यय से बना है। 1) 'अनु= पश्चात् कस्य चिद् ज्ञानान्तरं जायमानमिति ज्ञानम् अनुमितिः'। 2)अनु (पश्चात्) मीयते (ज्ञयते) इति अनुमानम्'। 3) अनु = पश्चात् (बाद में) मान =ज्ञान  अनुमान, का अर्थ है पश्चात् ज्ञान (पिछले प्रत्यक्ष ज्ञान या आप्तोपदेश के आधार पर बाद में माना ज...

पदार्थ विज्ञान में परीक्षा एवं प्रमाण क्या है?

प्रिय शिक्षार्थी, संस्कृत गुरुकुल में आपका स्वागत है। इस पोस्ट में हम "पदार्थ विज्ञान में परीक्षा एवं प्रमाण" का अध्ययन करेंगे। यह विषय पदार्थ विज्ञान के नोट्स (Padarth Vigyan notes ), बीएएमएस (BAMS) प्रथम वर्ष (Ist year) के पाठ्यक्रम का हिस्सा है। इसके पिछले अध्याय, पदार्थ विज्ञान के निम्नलिखित विषयों को शामिल कर चुके हैं: सम्बंधित पोस्ट Ayurveda Nirupana आयुर्वेदोक्त 41 गुणों के वर्गीकरण Classification of Darshana, Nyaya Darshana (दर्शन के प्रकार, न्याय दर्शन) परिभाषा,परीक्षा का महत्व, आवश्यकता एवं उपयोग 'प्रमाणैरर्थावधारणं परीक्षाम्' । प्रमाण द्वारा वस्तु की वास्तविकता का अनुमान या परीक्षण किया जाता है। शरीर की स्वस्थ अथवा रोग ग्रस्त स्थिति को जानने के लिए परीक्षा की आवश्यकता होती है। अर्थात रोगी परीक्षा. यह त्रिविध, चतुर्विधा, पंचविध, अष्टविध और दशविध भावों द्वारा किया जाता है। रोग परीक्षा पंच लक्षण निदान द्वारा की जाती है। रोग या रोगी की सफल परीक्षा के लिए प्रमाण का ज्ञान आवश्यक है। प्रमाण की परिभाषा इस शब्द में मनुष्य...