Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2022

Dik (Disha)- दिक् (दिशा)

दिक् (दिशा) निरूपण दिशा को आयुर्वेद मे दिक् (dik) भी कहा जाता है। यह 9 कारण द्रव्यों मे से एक है । स्वस्थवृत्त में इसके अनेकों उदाहरण देखने को मिलते है । शौच करते समय मुख किस दिशा में हो; किस दिशा की ओर बैठकर खाना चाहिए; किस दिशा की ओर सिर रखकर सोना चाहिए; किस दिशा में बैठकर पूजन आदि करना चाहिए आदि बातों का विस्तृत वर्णन स्वस्थवृत्त के अन्तर्गत मिलता है। रोगियों के लिए भी दिशा की मर्यादा के अन्तर्गत अनेक व्यवस्थाएँ आयुर्वेद में निर्दिष्ट की गयी हैं । औषधियों के संग्रह के लिए किस दिशा की वनस्पति हो; किस दिशा की ओर मुँहकर इसे तोड़ना चाहिए, किस दिशा की ओर मुँहकर इसका सेवन करना चाहिए आदि-आदि बातों का उल्लेख भी आयुर्वेद में प्राप्त होता है। यहाँ तक कि मकान आदि भी बनवाना हो तो उसका मुख्य प्रवेश द्वार किस दिशा में हो और किस दिशा में नही आदि का भी वर्णन आयुर्वेदीय स्वस्थवृत्त में प्राप्त होता है। जेन्ताक-स्वेदन के लिए निवासस्थान से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर भूमि का चयन करना चाहिए ( च० सू० १३०४६) । कुटीप्रावेशिक - रसायन में कुटी का निर्माण पूर्वोत्तर दिशा में होना चाहिए। पूर्व या...

काल निरूपन (Kala Nirupana)

हम सभी ने बचपन मे B. R. Chopra  जी की महाभारत अवश्य देखी होगी उस धारावाहिक में मुख्य वक्ता “काल (kala) या समय” है। इसके पहले एपिसोड में हमारा साक्षात्कार समय से होता है जो की महाभारत की अमर कथा सुनाते है। जिसमें समय या काल की महत्ता का वर्णन किया गया है की कैसे समय अनंत काल से सब कुछ देखते रहे हैं और सारा संसार काल में ही उत्पन्न होकर काल में ही समा जायेगा। जो आज है वो कल नही होगा, होगा तो सिर्फ़ काल, जो की शाश्वत, अनंत, अनादि है। इस ब्लॉग में हम काल के विषय में अपना ज्ञान वर्धन करेंगे और जानेगे की काल का आयुर्वेद में क्या महत्व है।  Related topics from the Dravya Nirupana Chapter Dravya (द्रव्य) Panchamahabhuta- पंचमहाभूत Akasha Mahabhuta (आकाश महाभूत) Vayu MahaBhuta (वायु महाभूत) Prithvi mahabhuta (पृथ्वी महाभूत) यह नौ में से आठवां करण द्रव्य है। यह अमृत (निरावयव) करण द्रव्य है। काल शब्द क + अ + ली (धातु) = काल से बना है काल का विवरण परिणामा या सृजन (संसार) में परिवर्तन को काल के रूप में जाना जाता है। काल एक ही है, ...