Vaisesika Darshan (वैशेषिक दर्शन), Padarth Vigyan(पदार्थ विज्ञान), BAMS

Hello learners, Welcome to Sanskrit Gurukul. In this post, we will learn about Vaisesika Darshan and its influence on Ayurveda philosophy. In this chapter of Ayurveda darshan Nirupana subjects we have learned about the following topics :

Vaisesika Darshan

Vaisesika Darshan is one of the six Astika Indian Darshana. Astika Darshana believes in the authority of the Vedas and tries to organize the meaning of the Vedic teachings. Other Astika Darshana include Nyaya, Yoga, Samkhya, Purva Mimamsa and Uttara Mimamsa.

वैशेषिक दर्शन, छः आस्तिक भारतीय दर्शनों में से एक है। आस्तिक दर्शन वेदों की सत्ता में विश्वास रखते हैं तथा वैदिक शिक्षाओं के अर्थ को व्यवस्थित करने का प्रयास करते है। अन्य आस्तिक दर्शन में न्याय , योग, सांख्य, , पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा शामिल है।

Vaisesika Darshana, Sanskrit, Ayurveda, BAMS

Vaisesika Darshan was written by Kanada Rishi, son of Aulukya Maharishi of Kashyapa gotra. All can recognize the Padartha (matter) in the sunlight and differentiate between the two things, but the owl can recognize and differentiate the Padartha in the night as well, so it is called Aulukya Darshana. The main purpose of this Darshana is to highlight the Padartha which helps in the development of life.
Vaisesika darshan is called so because it highlighted the description of ‘Vihesha’ of Shat padarth. He explained Shat bhava Padartha, they are dravya, Guna, Karma, Samanya, Vishesha, and Samavaya. It also describes Nava Karna Dravya as the basic elements to cause the creation which are panch mahabhuta, Atma(soul), Manas(mind), Kala(time), and Dik. Vaisheshika Darshan believes in Arambhawada and explained in detail the theory of Paramanuvada.
2 out of the 4 pramana are accepted which are Pratyaksha (perception), and Anumana (Inference). Shabda and Upamana are considered under Anumana Pramana. It explained a total of 24 Gunas (17 original and 7 added by commentators) known as Vaisesika Gunas.
वैशेषिक दर्शन कश्यप गोत्र के औलुक्य महर्षि के पुत्र कणाद ऋषि द्वारा लिखे गए थे। सभी लोग सूर्य के प्रकाश में पदार्थ को पहचान सकते हैं और दोनों चीजों में अंतर कर सकते हैं, लेकिन उल्लू रात में भी पादार्थ को पहचान सकता है और उसमें अंतर कर सकता है। इसलिए इसे औलुक्य दर्शन कहा जाता है। इस दर्शन का मुख्य उद्देश्य उन पदार्थों को उजागर करना है जो जीवन के विकास में मदद करते है।

वैशेषिक दर्शन को इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें षट पदार्थ के ‘विशेष’ के विवरण पर प्रकाश डाला गया है। उन्होंने शत भव पदार्थ की व्याख्या की, जो द्रव्य, गुण, कर्म, सामन्य, विशेष और सामवाय हैं। यह नव कर्ण द्रव्य के बारे में भी बताता है कि सृष्टि के मूल तत्व पंच महाभूत, आत्मा (आत्मा), मानस (मन), काल (समय) और दिक हैं। वैशेषिक दर्शन आरामवाद में विश्वास रखता हैं और परमानुवाद के सिद्धांत के बारे में विस्तार से बताया गया हैं।

4 में से 2 प्रमाण स्वीकार किए जाते हैं जो प्रत्यक्षा (धारणा) और अनुमन (अनुमान) हैं। अनुमन प्रमाण के तहत शब्द और उपमन को माना जाता है। इसमें कुल 24 गुण (17 मूल और 7 टीकाकारों द्वारा जोड़े गए) की व्याख्या की गई है, जिन्हें वैशेषिक गुण के रूप में जाना जाता है।

It contain 10 chapter as follows:
1st chapter is about Dravya, Guna, Karma, and Samavaya.
2nd and 3rd chapter about Nava dravya.
4th chapter is about Paramanu Vada.
5th chapter is about Karma.
6th chapter is about Veda- pramanya, Dharma, Adharma.
7th and 8th chapter about Guna.
9th chapter about Abhava.
And lastly 10th chapter is about Sukha, Dukha, Trividha karna.

इसमें 10 अध्याय इस प्रकार हैं:
पहला अध्याय द्रव्य, गुण, कर्म और सामवाय के बारे में है।
नव द्रव्य के बारे में दूसरा और तीसरा अध्याय।
चौथा अध्याय परमानु वाद के बारे में है।
पांचवां अध्याय कर्म के बारे में है।
छठा अध्याय वेद के बारे में है- प्रमाण, धर्म, अधर्म।
गुण के बारे में 7वां और 8वां अध्याय।
अभाव के बारे में नौवां अध्याय।
और अंत में दसवां अध्याय सुखा, दुख, त्रिविध कर्ण के बारे में है।

Shat Padartha in Vaisesika Darshan वैशेषिक दर्शन में षट पदार्थ:

According to Vaisesika Darshan, all the things that exist and can be experienced, are classified into Padarths which are six in categories as follow:
Dravya (substances): They are nine in numbers (Earth, water, fire, air, ether, time, space, soul, and mind),
Guna (attributes or quality): They are 24 in number. Vaisesika sutra mention 17 gunas and 7 are added later by commentators.
Karma (action),
Samanya (Generic concomitance),
Visesa (Variant factor), and
Samavaya (inherence).

वैशेषिक दर्शन के अनुसार, सभी चीजें जो मौजूद हैं और अनुभव की जा सकती हैं, उन्हें पदार्थों में वर्गीकृत किया गया है, जो निम्नानुसार छह श्रेणियों में हैं:
द्रव्य (पदार्थ): वे संख्या में नौ हैं (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, समय, स्थान, आत्मा और मन),
गुण : इनकी संख्या 24 है। वैशेषिक सूत्र में 17 गुणों का उल्लेख है और 7 को बाद में टीकाकारों द्वारा जोड़ा गया है।
कर्म (क्रिया),
सामान्य (सामान्य संयोग),
विशेष और
सामवाय।

24 Vaisesika qualities (Gunas) 24 वैशेषिक गुण :

24 types of qualities (Gunas) were explained in Vaisheshika Darshana (17 original and 7 added by commentators) –
1. Rupa – form or appearance
2. Rasa – taste
3. Gandha – smell
4. Sparsha – touch
5. Shabda – sound
6. Sankhya – calculations
7. Parimana – measurements
8. Prutakatva – distinguishing factor
9. Samyoga – combinations
10. Vibhaga – separation/division
11. Paratvam – important
12. Aparatvam – less important
13. Guru – heaviness
14. Drava – liquidity
15. Sneha – unctuousness
16. Buddhi – knowledge
17. Sukha – comfort
18. Dukha – discomfort
19. Iccha – desire
20. Dvesha – hatred
21. Prayatna – attempt
22. Dharma – performing actions as mentioned in the Vedas
23. Adharma – performing actions which are against those mentioned in the Vedas|
24. Samskara – potentiating the qualities of other things.

वैशेषिक दर्शन में 24 प्रकार के गुणों (गुणों) की व्याख्या की गई (17 मूल और 7 टीकाकारों द्वारा जोड़ी गई) –
1. रूप
2. रस – स्वाद
3. गंध – गंध
4. स्पर्श – स्पर्श
5. शब्द – ध्वनि
6. सांख्य – गणना
7. परिमाना – माप
8. प्रतकत्व – विशिष्ट कारक
9. संयोग – संयोजन
10. विभाग – अलगाव / विभाजन
11. परत्वम – महत्वपूर्ण
12. अपरत्वम – कम महत्वपूर्ण
13. गुरु – भारीपन
14. द्रव्य – तरलता
15. स्नेहा – असावधानता
16. बुद्धि – ज्ञान
17. सुखा – आराम
18. दुख – बेचैनी
19. इच्छा  
20. दवेशा – नफरत
21. प्रयास
22. धर्म – वेदों में वर्णित कर्म करना
23. अधर्म – वेदों में वर्णित कर्मों के विरुद्ध कर्म करना|
24. संस्कार – अन्य चीजों के गुणों को प्रबल करना।

Purpose of Darshana:

According to Vaisesika Darshan, dukkha or pain would be removed by correct knowledge of the six Padartha. With real knowledge, the person would know about God and be capable of attaining Moksha.

Relevance of Vaisheshika Darshana in Ayurveda आयुर्वेद में वैशेषिक दर्शन की प्रासंगिकता

  • Vaishesha tatwa has an important role in Ayurveda, it is implemented to reduce the aggravating factors by selecting the opposite principles.
  • It also accepted the Shat padartha but in a different sequence.
  • In the cause of creation, there is similarity, both believed that the creation is created from Mula Prakriti or Avyakta.
  • Both accepted the theory of Nava karana dravya, and Paramanu vada.
  • Ayurveda accepts the atomic theory, the concept of Triguna, etc of Vaisheshika Darshana. The principle mentioned in Vaisheshik Darshan on how to treat aggravated factors by making use of opposite factors is accepted and utilized in Ayurvedic treatment Ayurveda accepts the theory of 6 factors (Shat padarthas. The five types of actions (karmas) stated by Vaisesik Darsan is accepted by Ayurveda. Both Ayurveda and Vaisheshika Darshana believe in the eternity of soul (Nityatva of Atma) and minuteness of the mind (Anutva of Manas).
  • इसने षट पदार्थ को भी स्वीकार किया लेकिन अलग क्रम में।
  • सृष्टि के कारण में समानता है, दोनों का मानना था कि सृष्टि की रचना मूल प्रकृति या अव्यक्त से हुई है।
  • आयुर्वेद वैशेषिक दर्शन के परमाणु सिद्धांत, त्रिगुण की अवधारणा आदि को स्वीकार करता है।
  • वैशेषिक दर्शन में विपरीत तत्त्वों का प्रयोग कर बढ़े हुए तत्त्वों का उपचार कैसे किया जाए, इस सिद्धान्त को आयुर्वेदिक उपचार में स्वीकृत एवं प्रयोग किया जाता है।
  • आयुर्वेद द्वारा आयुर्वेद और वैशेषिक दर्शन दोनों आत्मा की अनंतता (आत्मा का नित्यत्व) और मन की सूक्ष्मता (मानस का अनुत्व) में विश्वास करते हैं।
Creator Maharishi Kanad or Uluk
SuperiorAulukya Darshana, Parallel,
Siddhanta Pilupaka-vada, Arambha-vada, Paramanu-vada
Pramanas Pratyaksha and Anumana
DravyaPanchamahabhuta, mind, direction, time, Soul.
KarmaUtkshepana (Abduction), Apakshepan (Depression), Akunchan (flexion), Prasaran (extension), Gamana (Locomotion)
Padartha Dravya (matter), Guna (quality), Karma (action), Samanya (general), Vishesha (special), Samavaya (equivalent)
SpecificityThe individual item has a single creature. The game of sorrow in childhood itself is true, it is formless, truth is Vaisesika philosophy.
GunaRupa, Rasa, Gandha, sparsha, Sukha, Dukha, Iccha, Dwesha, Prayatna.
रचनाकारमहर्षि कणाद या उलूक
पर्याय औलूक्य दर्शन, समानतन्त्र,
वादअसत्कार्यवाद, आरम्भवाद, परमाणुवाद
प्रमाणप्रत्यक्ष, अनुमान
द्रव्यपंचमहाभूत, मन, आत्मा, दिशा, काल
कर्मउत्क्षेपण, अवक्षेपण, आकुंचन, प्रसारण, गमन
पदार्थद्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय
विशेषताप्रत्येक वस्तु स्वयं में एक इकाई है, प्रत्येक आत्मा एक जीवात्मा है यही समान न्याय/ समान तंत्र है। शरीराभिमान ही अज्ञान है, बंधन एवं दुःख का कारण है। आत्मा सत्य है, निर्विकार है, यही वैशेषिक दर्शन है
गुणरूप, रस, गन्ध, स्पर्श, सुख, दुःख, बुद्धि, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न,

In the next lesson, we will learn more about other darshans. If this post helps to understand padartha Vigyan and Vaisesika darshan, please like and share the post. For any query and question please comment below. and don’t forget to subscribe to the blog.

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